क्या आप जानते है क्यों सभी वामपंथी और विपक्षी दल आरएसएस के खिलाफ हैं ? या देश में जब भी कुछ गलत होता है तो उसको आरएसएस से क्यों जोड़ कर प्रोजेक्ट किया जाता है | आपने बहुत सारे मीडिया चैनल पर देखा होगा कि विपक्ष और बामपंथी एक सुर में आरएसएस को कोसते नज़र आते हैं | हाल ही में JNU के कन्हिया कुमार ने तो देश के संबिधान के हिसाब से हुई आतंकियों के फांसी को नागपुर में बनाया हुआ संबिधान तक कह डाला और 9 फ़रवरी को आज़ादी की मांग की और उसी सभा में देश विरोधी नारे लगाये जाने के कई विडियो भी मीडिया में सामने आये, जिसके बाद देश भर में हुए विरोध पर 11 फ़रवरी को नए विडियो बना कर उसे संघ और सामंतवाद से आज़ादी बोल कर जोड़ दिया गया | पर आपने कभी सोचा है कि सभी तरह की बातें संघ से ही क्यों जोड़ दी जाती हैं? जबकि संघ के लोग केदारनाथ में भी मदद करने सबसे पहले पहुचे थे और चेन्नई में भी | वो असम में भी थे और ओडिशा में भी | या कह सकते हैं कि जहाँ भी कोई विपदा आती है संघ के स्वयं सेवक बिना अपनी जान की परवाह किये मदद करने के लिए वहां पहुच जाते हैं | परन्तु फिर भी बार बार बहुत से मीडिया चैनल, कांग्रेस के नेता, बामपंथी नेता संघ पर आरोप लगाते हैं यहाँ तक कि कुछ लोगों ने 26/11 को संघ की साजिश बताते हुए एक किताव भी लिख दी थी और उसके विमोचन में कांग्रेस के जाने माने नेता दिग्विजय सिंह भी थे |

आज यहाँ मैं आपने साथ हुए एक घटना को आप सब तक पंहुचा रहा हु और ये बात है उस समय की जब मैं स्कूल का विद्यार्थी था | उस समय हमें आरएसएस के कैंप ITC जो कि 7 दिन का था, के लिए स्कूल से नामांकित किया गया | कैंप का नियम था कि सभी को निर्धारित समय सीमा में कैंप में ही रहना पड़ेगा | जोकि शहर से बहार एक इंटर कॉलेज था | हम सभी विद्यार्थी सोच रहे थे कि कहाँ फंस गए वो भी घर से अलग 7 दिन के लिए |

RSS Path sanchalan
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निर्धारित तिथि को हम सभी अपना सामान ( रजाई, गद्दा, खाने के बर्तन और कपडे ) लेकर शाम के समय कैंप स्थान पर पहुचे| कैंप स्थान पर हमारे स्कूल के विद्यार्थियों के लिए एक दुसरे स्कूल तथा कुछ और लोगों के साथ कमरा दे दिया गया जहाँ हमें जमीन पर पुआल ( सूखी धान की पत्ती) पर अपना बिस्तर लगाना था | सभी को शाम में पहले उस कैंप के ग्राउंड में बुलाया गया और नियम समझाए गए| वो नियम थे

  • आप यहाँ सभी स्वयं सेवक हैं|  अतः आपको सभी काम स्वयं ही करने हैं | अपना विस्तर समेटने से लेकर अपने कपडे अथवा बर्तन धोने तक |
  • यहाँ पर सभी से उसके नाम के बाद “जी” लगा कर बात करनी है | चाहे वो आपसे छोटा हो या बड़ा |
  • सुबह और शाम कसरत करते समय आपको संघ की वेश भूषा ( सफ़ेद कमीज, निक्कर, मोज़े और जूते )   में आना है|
  • सभी के मोज़े उनके टखनों पर होने चाहिए मुड़े हुए ( क्युकि कैंप में निर्धन परिवार के सदस्य भी आते हैं और उनके मोजों की इलास्टिक ढीली होने की बजह से उनके मन में किसी प्रकार की ग्लानी न आये, इस बजह से सभी को मोज़े नीचे ही करने का नियम है | )
  • सभी के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जागने से लेकर रात्रि में सोने तक का समय और उसके बीच के कार्यक्रम का समय निर्धारित है | जो सभी के लिए समान है चाहे वो एक विद्यार्थी हो या व्यापारी हो |
  • कैंप में सभी को एक साथ पंक्ति में बैठ कर भोजन करना अनिवार्य था और बारी बारी से सभी को भोजन परोसना भी |
  • सभी को एक साथ कसरत करना, भोजन करना, शाखा में उपस्थित होना, संबाद तथा कविता पाठ समारोह में उपस्थित होना अनिवार्य था |

कुछ इस तरह के थे नियम जिन्होंने सिर्फ 7 दिनों में ही हमारी जिन्दगी बदल दी | अब आप सोच रहे होंगे कि इससे क्या फर्क पड़ता है और इससे क्यों बामपंथी या भाजापा को छोड़कर अन्य दल आरएसएस का विरोध क्यों करते हैं ? तो मित्रों जब आप बिना किसी की जाती पाती धर्म पूछे उसके साथ रहेंगे, बैठ कर खाना खायेंगे, कसरत करेंगे, खेलेंगे और अपने विचार रखेंगे | तो ऊँच, नीच का भेदभाव खत्म हो जायेगा | जो कि बामपंथी और अन्य दल नहीं चाहते| क्युकी वो सभी हिन्दुओं में फूट डाल कर दलित और स्वर्ण के नाम की राजनीती करना चाहते हैं और अल्पसंख्यक समुदाय को आरएसएस या अन्य हिंदूवादी संगठनों का डर दिखा कर सिर्फ वोट एंठना चाहते हैं | इसी बजह से वो सब मिलकर आरएसएस को रोकना चाहते हैं कि वो हिन्दूओं में कभी एकता न आने दे | आपने 2014 में देखा ही होगा कि मोदी लहर के नाम पर कैसे सभी लोग संगठित हुए और पूर्णबहुमत से सरकार बनी |

अब बाकी दलों को यही चिंता सता रही है कि यदि हिन्दुओं में से ऊँच नीच खत्म हो गयी तो उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी| फिर न वो अल्पसंख्यक समुदाय को किसी तरह का प्रलोभन दे पाएंगे न दलितों को सवर्णों से डरा पाएंगे | ना ही वो उनके विकास के नाम पर उनसे वोट मांग पाएंगे | क्युकि उन्होंने पहले ही देश पर 47 साल से ज्यादा राज किया है और तब विकास नहीं करवा पाए तो अब क्या करवाएंगे |

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