आज से डेढ़ साल पहले देश की जनता ने इतिहास रचा था| यूपीए के भ्रष्टाचार से तंग आ चुकी जनता ने एक उम्मीद की किरण देखी थी| लोगों ने नरेंद्र मोदी में अपनी सभी समस्याओं का हल देखा था| ये जनता की उम्मीदों का ही नतीजा था कि ३० साल बाद भारत में किसी राजनितिक दल को जनता ने बहुमत दिया हो| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जितना विश्वास जनता में जगाया, जनता ने उन्हें कहीं ज्यादा बड़ा जनादेश दिया| जनादेश लोगों की समस्याएं दूर करने का, जनादेश देश की तकदीर बदलने का, जनादेश आधारभूत जरूरतें पूरी करने का, जनादेश जनता में समरसता लाने का, जनादेश समावेशी विकास करने का|

acche din Vs Ban Din
acche din Vs Ban Din

ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री जी ने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश ना की हो, ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने देश का विकास करने की तरफ कदम ना बढ़ाये हो| निरंतर विदेश यात्रा करके प्रधानमंत्री जी ने पूरी दुनिया को भारत में निवेश का एक रास्ता दिखाया है | साथ ही में स्वच्छता अभियान चलाकर देश को साफ सफाई तथा योग दिवस के रूप में लोगों को अपने स्वस्थ्य के प्रति जागरूक भी किया | बहुत से लोगों ने इसमें उनका साथ भी दिया और बहुत से लोगों ने विरोध भी किया |मोदी जी ने मेक इन इंडिया का नारा देकर देश में एक नयी विकास की लहर पर मुहर लगाई | पर आज ये सवाल जेहन में उठता है कि विकास किसका हुआ? उस गरीब जनता का जो आजादी के बाद से ही अपनी सामान्य जरूरतें पूरी करने में जूझती रही या उन चंद पूंजीवादियों का जो ज्यादा से ज्यादा धन अर्जित करने की होड़ में लगे हैं?

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हमारे प्रधानमंत्री जी और उनकी सरकार को यह भली भांति समझना होगा कि जनता ने उनको इसलिए नहीं चुना था कि सरकार बिना उनकी इजाजत के उनकी जमीने ले ले| उन्होंने इसलिए भी नहीं चुना था कि सरकार उनको ये बताये कि कब क्या खाना है, किस भाषा में लिखना है, किस भाषा में बात करनी है, किसको कितने बच्चे पैदा करने है, कब कहाँ जाना है, कौन लेखक क्या लिखेगा और कौन अपने घर में क्या देखेगा? हमारे प्रधानमंत्री जी बाबुओं से हिंदी में बात करने को कहते है तो गृह मंत्री जी हिंदी में हस्ताक्षर करने को कहते है| कोई मंत्री जनता से चार बच्चे पैदा करने को कहता है तो कोई कहता है जो मोदी जी की बात नहीं मानते उनको पाकिस्तान चले जाना चाहिए| सरकार कभी पोर्न देखने पर प्रतिबन्ध लगाती है तो कभी मांस खाने पर| कभी मीडिया चैनलों को नोटिस भेजती है तो कभी गैर सरकारी संगठनो की मान्यता समाप्त करती है|

आज के समय में जनता के मन में बार बार यही विचार आता है कि ना ही देश में काला धन वापस आया है, ना ही आम जनता के अच्छे दिन आये है, जैसा कि चुनाव के दौरान हमारे प्रधानमंत्री जी ने वायदा किया था | ऐसा लगने लगा है कि सरकार को अच्छे दिन लाने से ज्यादा चिंता इस बात की है कि कब किस चीज पर ‘बैन’ लगाना है| हम इस बात से भी किनारा नहीं कर सकते की प्रधानमंत्री जी ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाये परन्तु जनता को जितनी तेजी से इन सब पर काम चाहिए था उसमें वो ज्यदा सफल नहीं हो पाए|

प्रधानमंत्री जी को यह भलीभांति मालूम होना चाहिए कि जनता ने उन्हें किस काम के लिए चुना है! वर्ना ये जनता निश्चय कर लेती है तो सत्ता के बड़े बड़े सिंहासन डोल जाते हैं|

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